बुधवार, जून 29, 2011

धरती और आसमां

धरती और आसमां

मैंने पढ़ा था कि

मां धरती और
पिता आसमां होता है
मैं खुश था कि
पूरे आसमां पर मैं
सितारों में टूटकर बिखर जाऊंगा
उसके सीने में

अपनी रोशनी भर दूंगा
एक तमन्ना सूरज बनने की भी उठी थी
क्योंकि मैं आसमां का ताप
अपने सीने में भर लेना चाहता था

मगर चाह आह बन बन गई
आसमां को गुमान हो गया कि
सितारे और सूरज उसे ढक लेंगे
यकायक आसमां थर्राया
मैं धरती पर आ गिरा
मगर अब भी आंखें
आसमां को निहार रही थीं
क्योंकि मैंने पढ़ा था कि
आसमां तो पिता होता है।

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